मेरे सनकी अरबपति बनने से पहले

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अध्याय 109

किरन की नज़र से

उसने अपना चेहरा मेरी हथेली में टिकाया, उसका गाल मेरी जख़्मी त्वचा से दब गया, और उसकी आँखें फिर से बंद होने लगीं। जैसे ये बिल्कुल सामान्य हो। जैसे वो ये हर वक़्त करती हो। जैसे मेरा हाथ टूटा-फूटा, गलत और बिगड़ा हुआ नहीं, बल्कि नरम और सुरक्षित हो।

“समर।” मेरी आवाज़ जैसे साथ ही नही...

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